दिवाली पर वास्तु के नाम से कई “हर घर पर लागू” नियम साझा किए जाते हैं। वास्तव में कमरे का आकार, हवा का रास्ता, परिवार की जरूरत और स्थानीय परंपरा अलग-अलग होती है। 2026 की दिवाली की तैयारी में ऐसे कदम चुनें जो घर को साफ, स्वागतयोग्य और सुरक्षित बनाएं। किसी दिशा में वस्तु न रख पाने से अशुभ फल की निश्चित भविष्यवाणी करना उचित नहीं।
सफाई और आने-जाने के रास्ते
सबसे पहले प्रवेश-द्वार और रोज उपयोग होने वाले रास्ते साफ रखें। टूटी या फिसलन वाली सजावट हटाएं; सीढ़ियों और दरवाजों के सामने दीपक न रखें। बंद पड़े सामान को दान, मरम्मत या जिम्मेदार निपटान के लिए छांटें। पूजा-स्थान की सफाई करते समय प्रतिमा, किताब या उपकरण को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखें।
पूजा-स्थान: परंपरा और सुविधा
कुछ वास्तु परंपराएं घर के उत्तर-पूर्व भाग को पूजा के लिए उपयुक्त मानती हैं। यदि वहां जगह, हवा या सुरक्षा नहीं है तो शांत, साफ और व्यवस्थित स्थान चुनना अधिक व्यावहारिक है। बैठने की जगह पर्याप्त हो और वृद्ध सदस्य सहजता से पहुंच सकें। पूजा की थाली के पास ज्वलनशील सजावट न रखें। किसी दीवार को तोड़ना या महंगा बदलाव करना केवल त्योहार के लिए आवश्यक नहीं।
दीये और रंगोली की योजना
रंगोली ऐसी जगह बनाएं जहां कोई फिसले नहीं और आपात रास्ता खुला रहे। बच्चों के साथ पानी-आधारित या पुन: उपयोग योग्य सजावट चुन सकते हैं। तेल के दीये सपाट, ताप-सुरक्षित सतह पर रखें; हवा में गिरने की आशंका हो तो सुरक्षित LED दीप इस्तेमाल करें। बिजली की लड़ियां लगाते समय तारों को पैरों के रास्ते से हटाएं और खराब प्लग बदलें।
पुराना लेख रंगोली और वास्तु की परंपरा पढ़ सकते हैं। पूजा की तिथि, जयपुर में रविवार 8 नवंबर 2026, स्थानीय पंचांग से मिलाई गई है। वास्तु-सुझाव सांस्कृतिक परंपरा हैं, किसी परिणाम की गारंटी नहीं।
चित्र-कथा: दिवाली: सफाई और सुरक्षित रोशनी