दिवाली से पहले “छोटी दिवाली 7 नवंबर है या 8 नवंबर?” सवाल आम है। 2026 में जयपुर के त्योहार कैलेंडर में काली चौदस शनिवार, 7 नवंबर और नरक चतुर्दशी रविवार, 8 नवंबर दिखाई देती है। नाम मिलते-जुलते हैं, लेकिन पर्व चुनने के लिए रात या भोर में चतुर्दशी की उपस्थिति जैसे अलग नियम देखे जाते हैं। इसलिए दोनों तारीखों को विरोधाभास मानना जरूरी नहीं।
तिथि मध्यरात्रि से नहीं बदलती
सामान्य कैलेंडर दिन रात 12 बजे बदलता है। पंचांग में तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से तय होती है; वह दिन के किसी भी समय शुरू या समाप्त हो सकती है। जयपुर में 2026 की कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 7 नवंबर 10:47 से 8 नवंबर 11:27 तक है। रात और अगले दिन की भोर दोनों इसी अवधि में आते हैं। अलग पूजा के लिए अलग समय का चयन होने से 7 और 8 नवंबर की तारीखें दिखती हैं।
घर की योजना कैसे बनाएं?
यदि घर में काली चौदस की विशेष पूजा की परंपरा है, तो अपने संप्रदाय और शहर का रात का मुहूर्त देखें। यदि नरक चतुर्दशी पर प्रातः अभ्यंग स्नान की परंपरा है, तो स्थानीय सूर्योदय और संबंधित मुहूर्त देखें। किसी परिवार में केवल दीपावली की शाम की पूजा होती है तो उसी को केंद्र में रखकर तैयारी करें। ऑनलाइन सूची के आधार पर व्यक्तिगत अनुष्ठान तय करने से पहले स्थानीय पंचांग या जानकार पुरोहित से पुष्टि कर लें।
क्या यही लक्ष्मी पूजा का दिन है?
जयपुर में लक्ष्मी-गणेश पूजा रविवार, 8 नवंबर की शाम को है; उसी दिन सुबह नरक चतुर्दशी की परंपरा भी पड़ सकती है। दो पूजाओं के समय और उद्देश्य अलग हैं। लक्ष्मी पूजा का सरल क्रम और पूरे सप्ताह का कैलेंडर अलग देखें।
तिथि और जयपुर त्योहार सूची का आधार स्थानीय हिंदू कैलेंडर और लक्ष्मी पूजा पंचांग है। शहर बदलने पर चयन फिर जांचें।
चित्र-कथा: काली चौदस और नरक चतुर्दशी