दीपावली 2026 की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर की शाम को होगी। जयपुर के पंचांग में प्रदोषकाल का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 18:03–19:59 बजे है। यदि आप दूसरे शहर में हैं, तो समय अपने शहर के अनुसार देखें। लक्ष्मी पूजा विधि, सामग्री और मंत्र परिवार की परंपरा के अनुसार बदलते हैं; यहां ऐसा सरल क्रम दिया है जिससे तैयारी बिना घबराहट के हो सके।
पूजा से पहले की तैयारी
चौकी और आसपास की जगह साफ करें। लक्ष्मी और गणेश का चित्र या प्रतिमा स्थिर, सुरक्षित स्थान पर रखें। दीपक, बाती, तेल या घी, जल, फूल, फल या उपलब्ध नैवेद्य, आरती की थाली और स्वच्छ कपड़ा तैयार रखें। दीये को पर्दों, कागज और तारों से दूर रखें। शंख या तेज धूप से किसी को परेशानी हो तो उसका विकल्प चुनें।
घर पर पूजा का सरल क्रम
- हाथ धोकर परिवार के साथ शांत मन से बैठें और पूजा का संकल्प करें।
- घर की रीति के अनुसार पहले गणेश वंदना करें। फिर लक्ष्मी का आवाहन कर जल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
- जिस घर में बहीखाता, कार्य उपकरण या अन्न का प्रतीकात्मक पूजन होता है, उसे सम्मान से रखें; कागज या इलेक्ट्रॉनिक सामान के पास लौ न ले जाएं।
- परिवार की प्रचलित आरती करें, प्रसाद बांटें और दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें।
कुछ आम प्रश्न
क्या बिल्कुल 18:03 बजे शुरू करना जरूरी है? यह जयपुर के लिए दिए गए मुहूर्त की शुरुआत है, किसी दूसरे शहर की नहीं। समय की उपलब्धता और परिवार की परंपरा मिलाकर पूजा करें।
सभी सामग्री न मिले तो? स्वच्छता, श्रद्धा और उपलब्ध साधनों के साथ पूजा की जा सकती है। महंगी वस्तु के बिना भी पूजा संभव है।
राशि के अनुसार अलग पूजा करनी चाहिए? सामान्य पारिवारिक पूजा के लिए जन्म राशि बदलना आवश्यक नहीं। व्यक्तिगत ज्योतिषीय सलाह अलग विषय है।
पूरी पूजा सामग्री सूची और त्योहार कैलेंडर भी देखें। मुहूर्त और अमावस्या की तिथि का स्रोत जयपुर का 2026 लक्ष्मी पूजा पंचांग है।
चित्र-कथा: लक्ष्मी पूजा 2026: सरल विधि