किसी वेबसाइट पर “दिवाली पूजा मुहूर्त” देखकर वह समय पूरे भारत पर लागू मान लेना आसान भूल है। 2026 में जयपुर के लिए लक्ष्मी पूजा रविवार 8 नवंबर, 18:03–19:59 बजे है; नई दिल्ली या चेन्नई का स्थानीय समय अलग होगा। पंचांग पढ़ते समय तिथि, शहर, समय क्षेत्र और पूजा की परंपरा को साथ देखना चाहिए।
तिथि और तारीख में क्या अंतर है?
तारीख नागरिक कैलेंडर का दिन है। अमावस्या तिथि सूर्य-चंद्रमा की गणना पर आधारित अवधि है, जो किसी दिन के बीच में शुरू या समाप्त हो सकती है। जयपुर में 2026 की अमावस्या 8 नवंबर 11:27 से 9 नवंबर 12:31 तक है। इसलिए केवल अमावस्या की शुरुआत देखकर शाम की पूजा का समय तय नहीं होता।
प्रदोषकाल और वृषभ काल
कई परंपराएं दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद का प्रदोषकाल देखती हैं। जयपुर के पंचांग में उस दिन प्रदोषकाल 17:40–20:16 और उसके भीतर वृषभ काल 18:03–19:59 बजे बताया गया है। प्रकाशित लक्ष्मी पूजा मुहूर्त इसी 18:03–19:59 की अवधि से मेल खाता है। अलग पंचांग की गणना या स्थानीय सूर्यास्त थोड़ा अलग परिणाम दे सकता है; इसलिए स्रोत और शहर जरूर देखें।
पांच-बिंदु जांच
- पंचांग में वर्ष 2026 चुना है?
- आपका शहर सही चुना है?
- समय 12-घंटे या 24-घंटे के रूप में दिख रहा है?
- मुहूर्त लक्ष्मी पूजा का है या केवल सामान्य चौघड़िया का?
- आपके परिवार में कोई विशिष्ट संप्रदाय या कुल-परंपरा है?
जन्मकुंडली का व्यक्तिगत मुहूर्त सार्वजनिक त्योहार मुहूर्त से अलग विषय है। इस लेख का उद्देश्य पंचांग की सूची पढ़ना है, किसी व्यक्ति का फलादेश देना नहीं। घर की पूजा विधि और त्योहार की तारीखें साथ रखें। समय और तिथि का स्रोत जयपुर लक्ष्मी पूजा पंचांग है।
चित्र-कथा: दिवाली मुहूर्त: पंचांग कैसे पढ़ें