धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। जयपुर के लिए प्रदोषकाल में लक्ष्मी-कुबेर पूजा का समय 18:11 से 20:07 बजे है। धनतेरस को धन्वंतरि जयंती और धनत्रयोदशी भी कहा जाता है; इसलिए परिवारों में पूजन की रीति अलग हो सकती है। नीचे का क्रम घर की सामान्य पूजा के लिए है, किसी एक संप्रदाय का अनिवार्य विधान नहीं।
पहले क्या तैयार रखें?
साफ चौकी, स्वच्छ कपड़ा, दीपक, रूई-बाती, तेल या घी, जल, फूल, फल या घर में उपलब्ध नैवेद्य और आरती की थाली पर्याप्त हैं। जिन घरों में लक्ष्मी, गणेश, कुबेर या धन्वंतरि की प्रतिमा या चित्र का पूजन होता है, उन्हें साफ स्थान पर रखें। चावल, रोली और धूप का प्रयोग परिवार की परंपरा के अनुसार करें। सामग्री न मिलने पर पूजा को अधूरा मानकर अनावश्यक खर्च न करें।
घर पर धनतेरस पूजा का सरल क्रम
- शाम से पहले पूजास्थान साफ करें और दीपक के लिए सुरक्षित, समतल जगह चुनें।
- हाथ धोकर परिवार के साथ संक्षिप्त संकल्प करें। पूजा का आशय कृतज्ञता, स्वास्थ्य और जिम्मेदार समृद्धि रखें।
- अपने घर की परंपरा के अनुसार गणेश वंदना के बाद धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर का स्मरण करें। जल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
- आरती करें और प्रसाद बांटें। धूप या दीप को unattended न छोड़ें।
- यदि यमदीप की प्रथा हो, तो उसे बाहर रखने से पहले स्थानीय सुरक्षा नियम और आग का जोखिम देखें।
क्या खरीदना आवश्यक है?
धातु या बर्तन खरीदने की परंपरा कई घरों में है, पर यह पूजा की शर्त नहीं। बजट में उपयोगी वस्तु, मिट्टी का दीपक या घर में मौजूद साफ पात्र भी पर्याप्त हो सकता है। सोना, चांदी या किसी निवेश को धार्मिक दबाव में न खरीदें। त्योहार स्वास्थ्य और घर की व्यवस्था पर ध्यान देने का अवसर भी है।
अगला चरण देखें: दीपावली की लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि और पूरे सप्ताह की तिथि सूची।
समय का स्रोत
जयपुर का 2026 धनतेरस पंचांग पूजा समय 18:11–20:07 और त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 10:30 से 7 नवंबर 10:47 तक दिखाता है। अन्य शहरों के लिए प्रदोषकाल अलग है; अपने स्थान का समय जांचें।
चित्र-कथा: धनतेरस पूजा 2026: सरल तैयारी